मौसम आधारित खेती

गर्मी और लू में फसल की देखभाल — सूखे से बचाव के 8 ज़रूरी उपाय

बढ़ते तापमान और लू में फसल झुलस सकती है। जानिए 8 आसान और वैज्ञानिक उपाय जिनसे फसल गर्मी में भी हरी-भरी रहे।

राजबीर सिंह ढिल्लों प्रकाशित 10 नवंबर 2025 5 मिनट का पठन अपडेट: 10 नवंबर 2025

गर्मी में फसल को क्या नुकसान होता है

जब तापमान 38–40°C से ऊपर जाता है, तो पौधों की वाष्पोत्सर्जन क्रिया तेज़ हो जाती है और वे तेज़ी से पानी खोते हैं। फूल और नए फल गिरने लगते हैं, पत्तियाँ मुरझा जाती हैं और उपज घट जाती है। लू चलने पर तो हरी फसल भी 2–3 दिन में झुलस सकती है।

सिंचाई का सही समय और तरीका

गर्मी में सिंचाई हमेशा सुबह जल्दी (5–8 बजे) या शाम को (5 बजे के बाद) करें। दोपहर में सिंचाई करने से जड़ों को झटका लगता है और बहुत-सा पानी वाष्प बनकर उड़ जाता है।

हल्की और बार-बार सिंचाई करें, एक-साथ बहुत पानी न भरें। ड्रिप या स्प्रिंकलर हो तो सबसे बेहतर, क्योंकि इनमें पानी सीधे जड़ों तक जाता है।

मल्चिंग से नमी बचाव

पौधे के आस-पास पुआल, सूखी घास या प्लास्टिक मल्च की परत बिछा दें। इससे मिट्टी की नमी 40–60% तक ज़्यादा समय तक बनी रहती है और तापमान भी 4–6°C तक कम रहता है।

छाया और विंडब्रेक

नर्सरी, सब्जियों और नए फलदार पौधों के लिए 35–50% ग्रीन शेड नेट बहुत उपयोगी है। खेत की मेंड़ों पर सहजन, अरहर या ऊँचे पौधे लगाने से 'विंडब्रेक' बनता है जो गर्म लू की तीव्रता कम करता है।

पोटाश और पोषण प्रबंधन

पोटाश (K) पौधों को गर्मी और सूखे को सहन करने की ताकत देता है। गर्मी शुरू होने से पहले सल्फेट ऑफ पोटाश या MOP का छिड़काव करें। साथ ही 0.5% पोटैशियम नाइट्रेट का पर्ण छिड़काव (foliar spray) फूलों और फलों को गिरने से बचाता है।

  • 13:0:45 (KNO3) — 5 ग्राम/लीटर पानी में छिड़काव
  • समुद्री शैवाल अर्क (seaweed extract) — तनाव कम करता है
  • जिंक और बोरॉन की कमी न होने दें

कीट-रोग पर विशेष ध्यान

गर्मी में सफेद मक्खी, थ्रिप्स, माइट, और वायरस रोग तेज़ी से फैलते हैं। पीले-नीले चिपचिपे ट्रैप लगाएँ, नीम तेल (5 मिली/लीटर) का छिड़काव करें और खेत की सफाई रखें। कमजोर पौधे तुरंत उखाड़कर हटा दें।

पशुओं और चारे की देखभाल

दुधारू पशुओं को छायादार जगह रखें, ठंडा पानी दिन में 3–4 बार दें और हरा चारा शाम को खिलाएँ। लू के दिनों में पशुओं की उत्पादकता 20–30% तक गिर सकती है, इसलिए विशेष ध्यान ज़रूरी है।

मौसम अलर्ट का उपयोग

IMD का 'मेघदूत' ऐप, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के अलर्ट और KisanLens जैसी सेवाओं से रोज़ मौसम देखते रहें। लू की चेतावनी मिलते ही सिंचाई पहले से कर लें और छिड़काव 1–2 दिन के लिए टाल दें।

गर्मी में खेतीलू से बचावमौसम आधारित खेतीसिंचाईपशुपालन

लेखक एवं समीक्षक

रसढ

राजबीर सिंह ढिल्लों

कृषि सलाहकार एवं किसान

M.Sc. कृषि (PAU लुधियाना), प्रगतिशील किसान

15+ वर्ष अनुभव लुधियाना, पंजाब

राजबीर सिंह स्वयं 35 एकड़ में गेहूं, धान और सब्जियों की प्रगतिशील खेती करते हैं। वे 15 वर्षों से ड्रिप सिंचाई, संरक्षित खेती और मंडी रणनीति पर किसान कार्यशालाएँ संचालित करते हैं।

यह लेख कृषि विशेषज्ञ द्वारा समीक्षित है। अंतिम समीक्षा: 10 नवंबर 2025

स्रोत एवं संदर्भ

  1. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) — फसल उत्पादन तकनीक दिशानिर्देश ICAR, नई दिल्ली
  2. कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय — योजना दस्तावेज़ भारत सरकार
  3. कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) — विस्तार सेवाएँ ICAR-ATARI

यह लेख ऊपर दिए गए वैज्ञानिक एवं सरकारी स्रोतों के आधार पर तैयार और सत्यापित किया गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संबंधित लेख

मौसम आधारित खेती
मौसम आधारित खेती 12 मिनट

मौसम आधारित खेती — कब, क्या और कैसे बोएं

मौसम के अनुसार खेती करके किसान अपनी पैदावार बढ़ा सकते हैं और जोखिम कम कर सकते हैं। यह लेख भारत के किसानों के लिए मौसम आधारित खेती पर एक विस्तृत मार्गदर्शिका है।

और पढ़ें →

मौसम आधारित खेती
मौसम आधारित खेती 9 मिनट

जलवायु परिवर्तन और किसान: अनुकूलन की रणनीतियाँ

जलवायु परिवर्तन भारतीय कृषि के लिए एक गंभीर चुनौती है। यह लेख किसानों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने और अपनी आय सुरक्षित रखने के लिए विभिन्न अनुकूलन रणनीतियाँ प्रस्तुत करता है।

और पढ़ें →

गेहूं की खेती
गेहूं की खेती 13 मिनट

गेहूं की उन्नत खेती — बीज से बंपर पैदावार तक पूरी गाइड

यह लेख गेहूं की उन्नत खेती के हर पहलू को कवर करता है, जिससे किसानों को बीज से लेकर बंपर पैदावार और भंडारण तक की पूरी जानकारी मिलती है।

और पढ़ें →