मिर्च में एन्थ्रेक्नोज (डाइ-बैक) रोग — कारण, लक्षण और असरदार इलाज
मिर्च की फसल में एन्थ्रेक्नोज और डाइ-बैक सबसे ज़्यादा नुकसान करने वाला रोग है। इस लेख में लक्षण, कारण, स्प्रे शेड्यूल और IDM रणनीति विस्तार से समझें।
विषय-सूची
एन्थ्रेक्नोज / डाइ-बैक क्या है
मिर्च का एन्थ्रेक्नोज या डाइ-बैक रोग Colletotrichum capsici और C. gloeosporioides नामक फफूंद से होता है। यह रोग मिर्च उगाने वाले हर राज्य — आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान — में सबसे बड़ी समस्या है। पके हुए लाल फलों पर सबसे अधिक नुकसान होता है, जिससे मंडी में कीमत आधी तक गिर जाती है।
यह रोग बीज-जनित (seed-borne) भी है और मिट्टी-जनित (soil-borne) भी। संक्रमित बीज से नर्सरी में ही रोग शुरू हो सकता है, और फल पकने के समय बारिश की बूंदों के छींटों से तेज़ी से फैलता है। यही कारण है कि नियंत्रण की शुरुआत बीज उपचार से ही होनी चाहिए।
उपज हानि 30-50% तक होती है, और गुणवत्ता खराब होने से बाजार मूल्य में 40-60% तक गिरावट आती है। इसलिए एन्थ्रेक्नोज मिर्च किसानों के लिए आर्थिक दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण रोग है।
मुख्य लक्षण — फल और तने पर पहचान
रोग की शुरुआत टहनियों के ऊपरी सिरों के सूखने से होती है — इसे 'डाइ-बैक' कहते हैं। धीरे-धीरे सूखापन नीचे की ओर बढ़ता है, फूल झड़ने लगते हैं और पूरी टहनी काली पड़ सकती है।
फल पर गोल, धंसे हुए (sunken), गहरे भूरे-काले धब्बे बनते हैं। इन धब्बों के बीच में गुलाबी-नारंगी बीजाणु द्रव्य (spore mass) दिखाई देता है, जो नमी में और तेज़ी से फैलता है। संक्रमित फल पेड़ पर ही सड़ने लगते हैं।
- टहनियों के सिरों का सूखना (डाइ-बैक)
- फल पर गोल, धंसे भूरे-काले धब्बे
- धब्बों के बीच गुलाबी-नारंगी बीजाणु
- फूलों का समय से पहले झड़ना
- बीजों का काला पड़ना
अनुकूल परिस्थितियां
रोग 25-30°C तापमान, 90% से अधिक नमी, और लगातार 2-3 दिन की बारिश में सबसे तेज़ी से फैलता है। खेत में पौधों की घनी बुवाई और खराब जल निकासी रोग को बढ़ावा देती है। अधिक नाइट्रोजन उर्वरक भी पौधों को संवेदनशील बनाता है।
यह फफूंद बीज और मिट्टी दोनों में 8-12 महीने तक जीवित रह सकती है। इसलिए एक बार खेत में रोग आने के बाद, फसल चक्र और मिट्टी उपचार दोनों ज़रूरी हैं।
बीज उपचार और नर्सरी प्रबंधन
बीज को कैप्टान 75% WS @ 3 ग्राम/किग्रा या थायरम 75% WS @ 3 ग्राम/किग्रा से उपचारित करें। इसके बाद Trichoderma viride @ 5 ग्राम/किग्रा से जैविक उपचार करें। यह दो-चरणीय उपचार बीज-जनित संक्रमण को 90% तक रोक देता है।
नर्सरी की मिट्टी को सौरीकरण (soil solarization) से 4-6 सप्ताह उपचारित करें — पारदर्शी प्लास्टिक शीट से मिट्टी को ढककर धूप में रखें। रोपाई से पहले पौधों की जड़ों को कार्बेन्डाजिम 50% WP @ 2 ग्राम/लीटर घोल में 30 मिनट डुबाएं।
जैविक नियंत्रण के तरीके
Trichoderma harzianum या T. viride को गोबर की खाद में मिलाकर (5 किग्रा Trichoderma + 100 किग्रा खाद प्रति एकड़) 10-15 दिन सड़ाकर खेत में डालें। यह मिट्टी में फफूंद की संख्या घटाता है।
पत्तियों पर Pseudomonas fluorescens 0.5% या नीम तेल 5 मिली/लीटर पानी का 10-15 दिन के अंतराल पर छिड़काव करें। दूध-पानी घोल (1:10) फूल आने के समय हल्के संक्रमण में उपयोगी है।
रासायनिक फफूंदनाशी और स्प्रे शेड्यूल
फूल आने से पहले प्रोपिनेब 70% WP @ 3 ग्राम/लीटर पानी का पहला निवारक (preventive) छिड़काव करें। फल बनने पर एज़ोक्सिस्ट्रोबिन 18.2% + डिफेनोकोनाज़ोल 11.4% SC @ 1 मिली/लीटर पानी सबसे प्रभावी है।
रोग गंभीर होने पर कार्बेन्डाजिम 12% + मैंकोज़ेब 63% WP @ 2 ग्राम/लीटर से 8-10 दिन अंतराल पर 2-3 बार स्प्रे करें। कटाई से 10-15 दिन पहले रासायनिक स्प्रे बंद कर दें।
- प्रोपिनेब 70% WP — 3 ग्राम/लीटर (निवारक)
- एज़ोक्सिस्ट्रोबिन + डिफेनोकोनाज़ोल — 1 मिली/लीटर
- कार्बेन्डाजिम + मैंकोज़ेब — 2 ग्राम/लीटर
- स्प्रे अंतराल: 8-10 दिन
- PHI: कम से कम 10-15 दिन
प्रतिरोधी किस्में और IDM रणनीति
पूसा ज्वाला, पंत सी-1, अर्का लोहित, LCA-334 और K-1 जैसी किस्में एन्थ्रेक्नोज के प्रति सहनशीलता दिखाती हैं। हाइब्रिड में सिन्जेंटा US-341 और Mahyco MHCP-319 अच्छे विकल्प हैं।
एकीकृत रणनीति में — प्रतिरोधी किस्म + बीज उपचार + नर्सरी सौरीकरण + Trichoderma + समय पर स्प्रे + 2 साल फसल चक्र (टमाटर/बैंगन नहीं) — शामिल करें। यह संयोजन उपज हानि को 5% से भी कम कर देता है।
लेखक एवं समीक्षक
डॉ. सुमन पाटिल
वरिष्ठ पादप रोग विशेषज्ञ
Ph.D. पादप रोगविज्ञान (Plant Pathology), महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ, राहुरी
18+ वर्ष अनुभव पुणे, महाराष्ट्र
डॉ. पाटिल फसल रोग, कीट प्रबंधन और एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) पर 18 वर्षों से काम कर रही हैं। उन्होंने 40+ शोध पत्र प्रकाशित किए हैं और महाराष्ट्र के KVK नेटवर्क में सक्रिय हैं।
यह लेख कृषि विशेषज्ञ द्वारा समीक्षित है। अंतिम समीक्षा: 29 अक्टूबर 2025
स्रोत एवं संदर्भ
- भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) — फसल उत्पादन तकनीक दिशानिर्देश ICAR, नई दिल्ली
- कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय — योजना दस्तावेज़ भारत सरकार
- कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) — विस्तार सेवाएँ ICAR-ATARI
यह लेख ऊपर दिए गए वैज्ञानिक एवं सरकारी स्रोतों के आधार पर तैयार और सत्यापित किया गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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