मल्चिंग क्या है — फसल की देखभाल का सबसे सस्ता और असरदार तरीका
मल्चिंग एक ऐसी तकनीक है जो पानी बचाती है, खरपतवार कम करती है और पैदावार बढ़ाती है — जानिए पूरा तरीका।
विषय-सूची
मल्चिंग क्या है
मल्चिंग का मतलब है — फसल के आस-पास ज़मीन को किसी परत (जैसे पुआल, सूखी घास, पत्तियाँ, गोबर या प्लास्टिक शीट) से ढक देना। यह परत मिट्टी की नमी, तापमान और संरचना — तीनों को संतुलित रखती है।
मल्चिंग के प्रमुख फायदे
मल्चिंग सिर्फ पानी ही नहीं बचाती, बल्कि पूरी फसल की सेहत सुधारती है। छोटी लागत में इसका असर बहुत बड़ा होता है।
- 40–60% तक पानी की बचत
- 70–80% खरपतवार नियंत्रण, निराई का खर्च कम
- गर्मी में मिट्टी ठंडी, सर्दी में गर्म
- मिट्टी का कटाव और पपड़ी बनना रोकता है
- जैविक मल्च सड़कर खाद बन जाता है
जैविक मल्च के प्रकार
जैविक मल्च मुफ्त या बहुत सस्ता होता है और मिट्टी को लंबे समय तक फायदा पहुँचाता है। धान का पुआल, गेहूं का भूसा, सूखी पत्तियाँ, नारियल की जटा, गन्ने की खोई और सड़ी हुई गोबर की खाद इसमें शामिल हैं।
इन्हें पौधे की जड़ से 2–3 सेमी दूर रखकर 5–7 सेमी मोटी परत बिछाएँ। हरी घास कभी न बिछाएँ — इसमें बीज होते हैं जो नए खरपतवार पैदा कर देते हैं।
प्लास्टिक मल्चिंग की जानकारी
सब्जियों जैसे टमाटर, मिर्च, शिमला मिर्च, तरबूज, खरबूज, स्ट्रॉबेरी में काली या चांदी-काली प्लास्टिक मल्च का बहुत उपयोग होता है। 25–30 माइक्रोन की शीट सबसे उपयुक्त है।
काला मल्च खरपतवार पूरी तरह रोकता है और मिट्टी गर्म रखता है। चांदी वाला सफेद मक्खी और थ्रिप्स जैसे कीटों को भगाता है। एक बार बिछाने के बाद 2–3 फसलों तक चलता है।
किन फसलों में मल्चिंग करें
सब्जियों (टमाटर, मिर्च, बैंगन, प्याज, लहसुन), फलदार पेड़ों (आम, अमरूद, अनार, केला, पपीता), बागवानी और यहाँ तक कि गन्ने में भी मल्चिंग बहुत असरदार है। कम पानी वाले क्षेत्रों में तो यह लगभग अनिवार्य मानी जाती है।
मल्चिंग बिछाने का सही तरीका
सबसे पहले खेत को साफ करें, खरपतवार निकालें और हल्की सिंचाई कर दें ताकि मिट्टी में नमी हो। इसके बाद बेड बनाकर उन पर मल्च शीट या जैविक परत बिछाएँ। पौधों की जगह छोटे छेद करके पौधे रोपें। ड्रिप पाइप मल्च के नीचे बिछानी चाहिए ताकि पानी सीधे जड़ों तक पहुँचे।
आम गलतियाँ और सावधानियाँ
मल्च को कभी भी पौधे के तने से चिपकाकर न बिछाएँ, इससे तना गलने का खतरा रहता है। बहुत पतली परत (2 सेमी से कम) बिछाने से खरपतवार नियंत्रण नहीं होता। इस्तेमाल के बाद प्लास्टिक मल्च को खेत से हटाकर सही जगह निपटाएँ, वरना मिट्टी की सेहत बिगड़ती है।
लेखक एवं समीक्षक
डॉ. सुमन पाटिल
वरिष्ठ पादप रोग विशेषज्ञ
Ph.D. पादप रोगविज्ञान (Plant Pathology), महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ, राहुरी
18+ वर्ष अनुभव पुणे, महाराष्ट्र
डॉ. पाटिल फसल रोग, कीट प्रबंधन और एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) पर 18 वर्षों से काम कर रही हैं। उन्होंने 40+ शोध पत्र प्रकाशित किए हैं और महाराष्ट्र के KVK नेटवर्क में सक्रिय हैं।
यह लेख कृषि विशेषज्ञ द्वारा समीक्षित है। अंतिम समीक्षा: 14 नवंबर 2025
स्रोत एवं संदर्भ
- भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) — फसल उत्पादन तकनीक दिशानिर्देश ICAR, नई दिल्ली
- कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय — योजना दस्तावेज़ भारत सरकार
- कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) — विस्तार सेवाएँ ICAR-ATARI
यह लेख ऊपर दिए गए वैज्ञानिक एवं सरकारी स्रोतों के आधार पर तैयार और सत्यापित किया गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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