कृषि दवा स्टोर — जैविक कीट नियंत्रक

रसायन मुक्त खेती के लिए प्रभावी व सुरक्षित जैविक कीट नियंत्रकों की पूरी जानकारी। ये उपाय पर्यावरण, मिट्टी और किसान — तीनों के लिए सुरक्षित हैं।

नीम तेल (Neem Oil)

उपयोग: रस चूसने वाले कीट (माहू, सफेद मक्खी, थ्रिप्स) पर अत्यंत प्रभावी।

मात्रा: 3-5 मिली प्रति लीटर पानी, 10-15 दिन के अंतराल पर छिड़काव।

लाभ: मिट्टी व लाभदायक कीटों के लिए सुरक्षित। फसल पर अवशेष नहीं छोड़ता।

बीटी (Bacillus thuringiensis)

उपयोग: इल्ली (कैटरपिलर) वर्ग के कीट — फल छेदक, तना छेदक, हरी इल्ली के नियंत्रण के लिए।

मात्रा: 1-2 ग्राम प्रति लीटर पानी, शाम के समय छिड़काव करें।

लाभ: केवल हानिकारक इल्लियों पर असर करता है, मित्र कीट सुरक्षित रहते हैं।

ट्राइकोडर्मा विरिडी

उपयोग: मिट्टी जनित फफूंद रोग (उकठा, जड़ सड़न, कॉलर रॉट) से बचाव।

मात्रा: 4-5 ग्राम प्रति किग्रा बीज से उपचार, या 2 किग्रा/एकड़ गोबर खाद में मिलाकर।

लाभ: जैविक फफूंदनाशक — पौधे की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।

ब्यूवेरिया बेसियाना

उपयोग: सफेद मक्खी, थ्रिप्स, माहू और दीमक के नियंत्रण में उपयोगी।

मात्रा: 5 ग्राम प्रति लीटर पानी, सुबह या शाम छिड़काव।

लाभ: जैविक कीटनाशक फफूंद — कीट के शरीर पर पनपकर उसे नष्ट करती है।

गोमूत्र अर्क

उपयोग: बहु-उद्देशीय कीट विकर्षक व पौध वृद्धि वर्धक।

मात्रा: 1 लीटर गोमूत्र + 10 लीटर पानी; पत्तियों पर छिड़काव।

लाभ: घर पर ही बनाया जा सकता है — पूर्णतः मुफ्त व रसायन मुक्त।

नीम खली (Neem Cake)

उपयोग: मिट्टी में मौजूद निमेटोड (सूत्रकृमि) व भूमिगत कीटों के नियंत्रण के लिए।

मात्रा: 200-250 किग्रा प्रति एकड़ — बुवाई से पहले मिट्टी में मिलाएं।

लाभ: जैविक खाद के रूप में भी कार्य करती है — मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है।

सलाह: जैविक कीट नियंत्रकों का छिड़काव सुबह या शाम के समय करें। तेज धूप में छिड़काव से असर कम हो सकता है। गंभीर कीट प्रकोप की स्थिति में अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से सलाह अवश्य लें।